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    Uttarakhand 500 करोड़ के घोटाले में कार्रवाई, CBI ने प्रदेश में 46 लोगों पर दर्ज किया मुकदमा

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     Uttarakhand 500 करोड़ के घोटाले में कार्रवाई, CBI ने प्रदेश में 46 लोगों पर दर्ज किया मुकदमा

     

    एलयूसीसी घोटाले में एक्शन में मूड में आई सीबीआई, 09 जिलों तक फैला जाम

    उत्तराखंड में सामने आए चर्चित लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) घोटाले में अब केंद्रीय जांच एजेंसी ने औपचारिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

    सीबीआई/एसीबी देहरादून ने एक साथ 46 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए 500 करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच अपने हाथों में ले ली है। यह कार्रवाई उत्तराखंड उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बाद की गई है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार एलयूसीसी के खिलाफ दर्ज मामले उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर और नैनीताल जिलों तक फैले हुए हैं।

    इन जिलों के विभिन्न थानों में कुल 18 आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए हैं, जिन सभी को अब सीबीआई ने एक साथ क्लब कर लिया है। मामले में पहली एफआईआर 1 जून 2024 को हुई थी दर्ज। इस बहुचर्चित घोटाले की शुरुआत कोतवाली कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) में हुई,

    जहां तृप्ति नेगी ने 1 जून 2024 को सोसाइटी के खिलाफ पहली लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इसी एफआईआर को अब मूल (बेस) केस मानते हुए सीबीआई ने अपनी जांच शुरू की है।

    2022 से शुरू हुई ठगी, 2024 में ऑफिस बंद कर फरार
    जांच में सामने आया है कि एलयूसीसी ने वर्ष 2022 से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अपने दफ्तर खोले और एफडी, आरडी, बचत जमा के नाम पर लोगों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर धन जमा कराया।

    वर्ष 2024 में अचानक सभी कार्यालय बंद कर दिए गए और सोसाइटी के पदाधिकारी व एजेंट गायब हो गए, जिसके बाद ठगी का व्यापक खुलासा हुआ।

    02 जनहित याचिकाओं से सीबीआई तक मामला पहुंचा
    घोटाले के खिलाफ सबसे पहले ऋषिकेश निवासी अशुतोष ने 25 मार्च 2025 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल की। याचिका में आरोप लगाया गया कि एलयूसीसी अवैध रूप से संचालित होती रही और जनता की जमा-पूंजी का दुरुपयोग किया गया।

    इसके बाद अपर तुनवाला निवासी विशाल छेत्री ने भी इसी प्रकरण में एक अन्य याचिका दाखिल कर सीबीआई जांच की मांग की। दोनों याचिकाओं पर सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने 17 सितंबर 2025 को सीबीआई को जांच सौंपने का आदेश दिया।

    आंदोलन से मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला
    घोटाले से पीड़ित निवेशक न्याय की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए। धरना-प्रदर्शन से लेकर मुख्यमंत्री आवास कूच तक आंदोलन हुआ।

    शुरुआत में मामले की जांच सीबीसीआइडी कर रही थी, लेकिन जनआक्रोश और तथ्यों की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीबीआई जांच की संस्तुति की।

    अब तक 20 गिरफ्तारियां, चार्जशीट भी दाखिल
    सीबीआई के हवाले होने से पहले सीबीसीआइडी द्वारा 20 आरोपियों की गिरफ्तारी और 10 मुकदमों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

    अब सीबीआई ने जांच से जुड़े सभी दस्तावेज सीबीसीआइडी से अपने कब्जे में ले लिए हैं और मामले की परत-दर-परत जांच शुरू कर दी है। सीबीआई द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद आर्थिक लेन-देन, बैंक खातों,

    सोसाइटी नेटवर्क की व्यापक जांच होने की उम्मीद है। निवेशकों को भरोसा है कि अब 500 करोड़ से ज्यादा की इस कथित ठगी के मुख्य कर्ताधर्ता बेनकाब होंगे और धन की बरामदगी का रास्ता खुलेगा।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

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