सदियों पुरानी है प्रथा
बुधवार 12 अप्रैल: बदरीनाथ मंदिर में भगवान को लेपन किए जाने के साथ ज्योत में जलने वाले तिल तेल को नरेंद्र नगर स्थित राजमहल में महारानी के साथ सुहागिन महिलाओं ने विधि विधान से पूजा अर्चना के बाद पिरोया यानी निकाला।
आज सुबह तिल तेल को निकाले जाने की प्रक्रिया राजा मनु जयेंद्र शाह और महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह, राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल की उपस्थिति में विधि विधान के साथ प्रारंभ हुई। इसे शाम को गाडू घड़े में भरकर राजदरबार से श्री बदरीनाथ धाम के लिए रवाना किया जाएगा।
तेल कलश यात्रा विभिन्न पड़ावों से होते हुए 26 अप्रैल को बदरीनाथ धाम पहुंच जायेगी। कपाट खुलने के अवसर पर गाडू घड़ा के तिलों के तेल से बदरीविशाल का छह माह तक अभिषेक किया जायेगा। गौरतलब है कि श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 27 अप्रैल को प्रातः 7 बजकर 10 मिनट पर विधि-विधान से खुल जायेंगे।
बता दें कि सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार भगवान ब्रदीविशाल के लेप और अखंड ज्योति जलाने के लिए उपयोग तिल का तेल सदियों से उपयोग में आता है। नरेन्द्रनगर स्थित टिहरी राजमहल में महारानी के अगुवाई में पवित्रता से राजपरिवार और नगर की सुहागिन महिलाओं द्वारा पीला वस्त्र धारण कर मूसल और सिलबट्टे से निकाला जाता है। शुक्रवार को तिल का तेल महाराजा की पुत्री श्रीजा शाह अरोड़ा की अगुवाई में नगर की 60 से अधिक सुहागिन महिलाओं द्वारा पीले वस्त्र धारण कर निकाला गया। इस दौरान मूसल और सिलबट्टे से परंपरागत तौर तरीकों को अपनाते हुए हाथों से निकाला गया है।
