गुरिल्लाओं ने तीन सूत्रीय मांगों की स्वीकृति को लेकर एसडीएम को सौंपा पत्र
कीर्ति नगर भोलू भारदारी पार्क में गुरिल्लाओं ने एक मीटिंग आहूत की। जिसमें नौकरी पेंशन आश्रितों को लाभ और गोरिल्लाओं को एक मुस्त राशि की मांग की गई। इसके बाद मांग पत्र एसडीएम को पत्र सौंपा गया।
एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया कि 12 जनवरी को मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजा गया था जिसके बाद मुख्यमंत्री ने सकारात्मक रवैया के साथ कहा था कि आपका काम जल से जल्द हो जाएगा। परंतु 18 साल से इस मामले में कोई विचार विमर्श नहीं हो पाया है। पत्र में तीन सूत्रीय मांगों को नजर अंदाज ना करते हुए 15 दिन के भीतर इस पर गोरिल्ला के पक्ष में निर्णय लेने की मांग की।
मीटिंग में ब्लॉक अध्यक्ष हिम्मत सिंह मेहरा, उत्तम रतूड़ी महासचिव, अनिल प्रसाद भट्ट सचिव, बृजमोहन गोसाई, राजेंद्र भंडारी, हिंडोला खाल ब्लॉक से जवाहर सिंह बिष्ट, विनोद सिंह साजवान आदि मौजूद रहे
वही युद्ध प्रशिक्षित गोरिल्ला संगठन पिथौरागढ़ में भी पिछले महीने मुख्यमंत्री को गोरेलाल की तीन सूत्रीय मांगों की स्वीकृति को लेकर ज्ञापन भेजा गया।
पिथौरागढ़ के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र राम ने ज्ञापन के जरिए अवगत कराया कि गोरिल्ला संगठन उत्तराखंड के 13 जिलों में 2006 से 2024 तक 18 सालों से तीन सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत है।दो बार नैनीताल हाई कोर्ट ने गोरिल्लाओं के पक्ष में फैसला सुना दिया है मगर उसके बाद भी केंद्र सरकार व राज्य सरकार गोरिल्ला की कोई शुद्ध नहीं ले रही है।
वही गुवाहाटी हाई कोर्ट के निर्णय के बाद मणिपुर के 800 जवानों की नौकरी पेंशन मुआवजा दिया गया है। केंद्र सरकार उसके बाद सुप्रीम कोर्ट चली गई मगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला 2003 के आदेश में गुरिल्लाओ के पक्ष में आया। उसी तर्ज पर नैनीताल हाई कोर्ट में 3 अगस्त 2022 को पूर्वोत्तर राज्यों की भांति पेंशन नौकरी मुआवजा देने की घोषणा की। परंतु उसे पर सरकार ने गोरिल्लाओं का भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया की दिनांक 12 अक्टूबर 2023 को देश के प्रधानमंत्री मोदी को भी इसकी सूचना दी गई और गोरेलाल की तीन सूत्रीय मांगे निम्न है:
1- 60 साल से पार कर चुके गुरिल्लाओं को पेंशन 19000 रुपए दी जाए।
2- जिन गोरिल्ला की उम्र 60 साल से कम है उन्हें नौकरी दी जाए
3- मृतक आश्रितों को पारिवारिक पेंशन दी जाए वही एक मुस्त मुआवजा 2006 से 2024 तक का दिया जाए।
