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    उत्तराखण्ड में हजारों सरकारी स्कूल बंद होने को मजबूर

    उत्तराखंड। राज्य में 23 माध्यमिक विद्यालय शून्य छात्र संख्या और विद्यालयों के विलय के कारण बंद हो चुके हैं। जबकि तीन हजार प्राथमिक विद्यालय बंद होने के कगार पर हैं। जिनमें छात्रों की संख्या घटकर 10 या उससे भी कम रह गई है। यह स्थिति तब है जब विभाग के पास दस हजार करोड़ से अधिक का बजट है। वहीं विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत दावा कर रहे हैं कि गांव में बच्चे हैं तो क्षेत्र का एक भी स्कूल बंद नहीं होगा। पिछले तीन सालों में राज्य में बंद हुए माध्यमिक स्कूलों में टिहरी, पौड़ी, ऊधमसिंह नगर, देहरादून, चमोली और नैनीताल जिले के स्कूल शामिल हैं।टिहरी जिले में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्वीली, पौड़ी जिले में राजकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सौड़ियाखाल और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़कोट को शून्य छात्र संख्या के कारण बंद कर दिया गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार विद्यालयों में छात्र संख्या कम होने के कारण विद्यालयों(Uttarakhand Schools) को बंद किया गया है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि यदि गांव में बच्चे हैं तो सरकार एक भी स्कूल बंद नहीं करेगी।एक हजार से अधिक छात्र संख्या वाले मात्र 11 इंटर कालेज: प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में छात्रों की घटती संख्या का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि राज्य में मात्र 11 इंटर कालेज हैं, जिनमें छात्र संख्या एक हजार से अधिक है। जबकि छात्र संख्या 500 से कम वाले 1108 इंटर कालेज हैं।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

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