उत्तराखंड के देहरादून में देश का पहला तीन दिवसीय क्राइम लिटरेचर महोत्सव आयोजित किया गया है। उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि सही तरह से की गई क्राइम रिपोर्टिंग समाज को सतर्क करने का काम करती है।
तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन हंस फाउंडेशन की माता मंगला ने फिल्म निर्माता सुजॉय घोष और संजय गुप्ता के साथ किया। अपराध कथा लेखकों, फिल्म निर्माताओं, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारियों और टीवी हस्तियों सहित लगभग 40 पैनलिस्ट सप्ताहांत में साइबर मुठभेड़ों, अपराध लेखन में महिलाओं, पुस्तकों को फिल्मों में ढालने और अपराध रिपोर्टिंग की बारीकियों जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे।
डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि क्राइम रिपोर्टिंग लोगों को सतर्क और अवेयर करने का काम भी करती है। क्रिमिनल क्राइम को अंजाम देने के लिए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे है इसकी जानकारी क्राइम रिपोर्टिंग से मिलती है। कहा, क्राइम रिपोर्टिंग गंभीर और जिम्मेदारी से किये जाने वाला कार्य है। पूर्व डीजी आलोक बी लाल ने कहा कि क्राइम रिपोर्टिंग सिर्फ वारदात की सूचना तक ही सीमित नही हैं, इसके माध्यम से कानून व अधिकारों के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया जाता है।

फेस्टिवल की शुरुआत ‘शूटआउट एट वडाला’ के निर्देशक संजय गुप्ता के एक सत्र से हुई, जिन्होंने ‘एडाप्टिंग एंड बीइंग एडाप्टेड’ विषय पर बात की और अपराध उपन्यासों को फिल्मों में ढालने की प्रक्रिया पर अंतर्दृष्टि साझा की। अगले सत्र में फिल्म निर्देशक सुजॉय घोष, जो ‘कहानी’ और ‘जाने जान’ जैसी क्राइम थ्रिलर के लिए जाने जाते हैं, उनकी नई फिल्म जापानी उपन्यास ‘द डिवोशन ऑफ सस्पेक्ट एक्स’ पर आधारित है।
कार्यक्रम में क्राइम रिपोर्टर शम्स ताहिर खान, पूर्व आईपीएस अधिकारी आलोक लाल और उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने ‘पुलिस और क्रिमिनल माइंड्स’ पर अपने अनुभव साझा किए।

