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Margshrish amavasकब है मार्गशीर्ष अमावस्या? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त और उपाय

Amavasya... अमावस्या

इस साल मार्गशीर्ष अमावस्या या अगहन की अमावस्या तिथि 19 नवंबर की सुबह 09:43 बजे शुरू होगी और 20 नवंबर की दोपहर 12:16 बजे खत्म होगी। ऐसे में आधे दिन अमावस्या तिथि 19 को मिल रही है और आधे दिन 20 को मिल रही है। उदया तिथि में अमावस्या 20 को है। अमावस्या पर स्नान, दान और पितृ कर्म का बहुत अधिक फल मिलता है, इसलिए यह इस दिन करना चाहिए। अमावस्या तिथि पर कंबल, गुड़, घी, तिल, तिल के लड्डू, या धन का दान करना उत्तम होता है। आपको बता दें कि मार्गशीर्ष मास को बहुत अधिक पवित्र माना गया है। भगवान ने गीता में इस मास के महत्व को बताया है, इसलिए इस मास की अमावस्या पर भी खास पूजा पाठ की जाती है। अमावस्या तिथि पितरों के पित-कर्म के लिए भी खास मानी जाती है। इस दिन दोपहर में पितरों के लिए अग्पारी देकर उन्हें भोजन दिया जाता है और सूर्य को जल अर्पित किया जाता है। इससे पितरों का संतुष्टि मिलती है और पितृदोष नहीं झेलना पड़ता है। अगहन के मास में कृष्ण जी की विशेष पूजा करनी चाहिए।

अगहन अमावस्या पर उपाय और दान 

 

अगहन अमावस्या पर पीपल के पेड़ पर कच्चा दूध अर्पित करना चाहिए। इसके बाद शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। पीपल के पेड़ पर तीनों देवों का वास माना जाता है। पितरों के अलावा इन पांच जगहों पर गाय, कुत्ता, कौवा, देव आदि के लिए भोजन निकालना चाहिए। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, आदि दान करना चाहिए। इस दिन घरों में क्लेश ना करें, साफ-साफाई का ध्यान रखें। इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा में पितरों के लिए स्नान भी किया जाता है।

 

इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

पितृ दोष से मुक्ति के उपाय-

पितृ दोष की वजह से व्यक्ति का जीवन परेशानियों से भर जाता है। इस दोष से मुक्ति के लिए अमावस्या के दिन पितर संबंधित कार्य करने चाहिए। पितरों का स्मरण कर पिंड दान करना चाहिए और अपनी गलतियों के लिए माफी मांगें।

By swati tewari

working in digital media since 5 year

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