कुछ दिन पूर्व लिखी थी मार्मिक पोस्ट
वरिष्ट पत्रकार जगमोहन रौतेला की पत्नी रीता खनका रौतेला का कैन्सर की बीमारी से निधन हो गया। वह पिछले दो वर्षों से कैन्सर की इस बीमारी से जूझ रही थी।
उनके निधन पर आयोजित शोक सभा मे पत्रकार व वाहिनी के प्रवक्ता दयाकृष्ण काण्डपाल ने कहा कि वह पिछले दो वर्षो से कैन्सर की बिमारी से जूझ रही थी कई बार ऐसे मौके आये जब उन्होंने मौत को मात दी थी वह फिर से उठ खड़ी हुई थी पर इस बार जब कीमों थिरेपी हुई तो वह उठ ही नही पाई। और हमेशा के लिये शान्त हो गई।
पत्रकार जगमोहन उनके बीमारी की दिनों की तस्वीरे व वीडियो साझा करते रहे। हर बार रीता अपने इस कष्ट को कमतर दिखाती हुई दिखी , उन्होंने तय किया कि कैंन्सर जैसी असाध्य बीमारी को यदि वह मात नही दे सकी तो भी अपने देह को सुशीला तिवारी मे़ड़िकल कालेज हल्द्वानी को दान कर देंगी। जगमोहन रौतेला ने उनकी इस इच्छा को पूरा कर दिया।
अब रीता खनका मेड़िकल कालेज मे अपना शरीर छात्रों के लिये छोड़ गई है। यदि संम्भव हुआ तो छात्र इस बात का पता लगाएंगे कि कैन्सर के रोग का उपचार क्या है?
लेखिका रीता खनका , आने वाली पीढियों के लिये पठन साहित्य , व लेख छोडकर गई है , व अपनी पुत्री व पति को छोडकर संसार से विदा हो गई।

उनके निधन पर उत्तराखण्ड़ लोक वाहिनी ने गहरा दुख व शोक व्यक्त किया। परिवार के लिये हार्दिक संवेदना व्यक्त की है। एड जगत रौतेला की अध्यक्षता मे शोक सभा आयोजित हुई । जिसमे दयाकृष्ण काण्डपाल , एड जगत रौतेला , पूरन चन्द्र तिवारी , अजय मित्र सिंह बिष्ट , अजय.रौतेला , रेवा बिष्ट , मुहम्मद हारिस , कुणाल तिवारी आदि शामिल रहे ।
कुछ दिन पहले उन्होंने फेसबुक पर एक मार्मिक पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि वह जितना जीना चाहते हैं, उतना जी चुके हैं। हम पाठकों की सुविधा के लिए उनका पोस्ट यहाँ रख रहे हैं। इस पोस्ट को उन्होंने 21 मई को अपने फेसबुक वॉल पर सार्वजनिक किया था।
“अब मेरे शरीर से मुक्ति के लिए प्रार्थना करो, गहरी पीड़ा से छुटकारा पाने के लिए
पिछले ढाई साल से कैंसर से बीमार होने के बाद से सैकड़ों शुभचिंतकों, मित्रों और रिश्तेदारों ने मेरे स्वास्थ्य के बारे में चिंता व्यक्त की है और मेरे शीघ्र स्वस्थ होने की हजारों बार प्रार्थना की है। इसने मुझे और मेरे परिवार को इस बीमारी से लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है। इन सबके लिए मैं और मेरा परिवार सदैव आपका ऋणी रहेगा।
अब मेरी बीमारी ऐसी हो गई है कि आगे जीने की कोई उम्मीद नहीं है। लोग मौत से जूझ रहे हैं, लेकिन मैं जिंदगी से जूझ रहा हूं। मुझे जीवन की चटनी नहीं, बल्कि मृत्यु के आलिंगन की आवश्यकता है, ताकि मैं जल्द से जल्द गहरी पीड़ा और पीड़ा से मुक्त हो सकूं। किसी भी जीव के जीवन का परम सत्य मृत्यु को गले लगाना है। और मैं और मेरा परिवार इसे पूरी ईमानदारी से स्वीकार करता है। ऐसे में यदि मेरा यह शरीर रसों से रहित हो जाय तो कोकिला और उनके पति को मेरी मुक्ति का दु:ख तो होगा ही, पर वे इस दु:ख की पीड़ा को स्वीकार करेंगे।
जब मैं मृत्यु के आलिंगन की तलाश में हूं, तो निर्जीव होकर सात क्विंटल लकड़ी को अपना शरीर समर्पित करने के बजाय, कल, 20 मई, 2023 को मेडिकल कॉलेज को देने का निर्णय लिया है। यह निर्णय हम दोनों ने बहुत पहले ही ले लिया था। लेकिन कागजी औपचारिकता पूरी नहीं कर सके। वह औपचारिकता भी कल, 20 मई, शनिवार को पूरी कर दी गई है। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्रशासन, जिला प्रशासन व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को औपचारिक संकल्प पत्र भी सौंपा गया है।
मेरी भाभी और मेडिकल कॉलेज में शिक्षक डॉ. दीपा चुफाल देउपा, बहनोई अंकुश रौतेला, बुलबुल के साले, साले के दोस्त ललित मोहन लोहानी और ननद विभाग इस संकल्प को पूरा करने में दीपचंद्र भट्ट ने मेरा साथ दिया है। मैं इन सबके प्रति भी आभार व्यक्त करता हूँ।
अब मैं इस वजह से भी जल्द ही अपने शरीर से छुटकारा पाना चाहता हूं, ताकि उसके बाद मेरे आईसीयू में एक मरीज मेरे बिस्तर पर आ जाए, जिसे जीवन की चटनी की बहुत जरूरत है। मेरे जीवन का अब कोई मतलब नहीं है। शादी के बाद मैंने अपनी जिंदगी को पूरी तरह से जिया है। मैंने लिखना, पढ़ना और तर्क करना सीखा। सबसे बड़ी बात यह है कि मैंने शादी के बाद ही सास ईजा और बुलबुल के बाऊजू की प्रेरणा से धारा प्रवाह कुमाऊंनी सीखी। मैं इसे अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि मानता हूं। शादी के बाद ही मैंने अपने कुमाऊंनी लोक जीवन के तीज-त्योहारों को मनाना और लोक परंपरा का पालन करना सीखा।
आज मैं इस स्थिति में नहीं हूँ कि मैं स्वयं कुछ लिख सकूँ। यह पोस्ट मुझे बुलबुल के जीजा का लिखा मिल रहा है। हो सकता है कि इस पोस्ट के शब्द हूबहू मेरे न हों, भाव के शब्द पूरी तरह मेरे हों।
अंत में एक बार फिर मैं आप सभी से सहयोग चाहता हूँ कि इस शरीर से जल्द से जल्द मुक्ति मिले। मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं कि आप अपने-अपने देवी-देवताओं से मुझे इस नश्वर शरीर से मुक्त करने के लिए कहें। आप सभी ने पिछले ढाई साल में मेरे जीवन की कामना की है, अब बिना किसी हिचकिचाहट के शरीर से मुक्ति की प्रार्थना में सहयोग करें। आपका प्यार और सहयोग ही मेरी बेटी बुलबुल और उसके पति को आत्मबल देगा।
आप सभी का जीवन प्रेम, स्नेह और सहयोग से परिपूर्ण हो, यही मेरी कामना है।”
