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    बेजुबानों के गोपाल सूर्या राणा, बेजुबानों की सेवा का ऐसा जज्बा, ये भी सूर्या की आहट से समझ जाते हैं आ गया हमारा खेवनहार

    Byswati tewari

    Jun 21, 2023


    हरिद्वार। “सेवा परमो धर्मो” को चरितार्थ करते शहर निवासी सूर्या राणा ने इन बेजुबानोँ की सेवा कर इन्हीं बेजुबानोँ को अपना बेहतर परिचय दे दिया। कहने में कोई गुरेज नहीं ये बेजुबां जरुर हैं लेकिन सोचने, समझने की क्षमता में ये इंसानों से कमतर नहीं होते हैं। ये भी बखूबी याद रखते हैं किस हाथ से रोटी और किससे दुत्कार मिलती है।

    सूर्या ने अपनी वो चमक और धमक इनके दिलो-दिमाग में छोड़ दी इनकी दबे पैरों की आहट इन बेजुबानोँ में प्राण भर देती है। एक पशु को मुट्ठी भर चारे के साथ अनगिनत मानुस फोटो खिचवां तमाम सोसल साईट पर पुण्य प्राप्ति को धमाल मचाते कई बहुमुखी दिखते हैं। इन सब तमाशों से दूर सूर्या राणा इन बेजुबानोँ की निस्काम सेवाभाव में जुटे रहते हैं। औरों को भी इनकी सेवा को कहते हैं। शासन-प्रशासन को भी श्री राणा द्वारा कई कागजी कार्यवाही के माध्यम से हर जिले, शहर तथा कस्बों में पेयजल हेतु बर्तन रखने को लिखा गया कहीं अमल भी हुआ।

    सूर्या राणा के इस सेवाभाव जैसा अभी तक कोई नही दिखा ऐसा जो पशु पक्षी जीव जंतुओं की सेवा में लगा हो। असलियत में जीव जंतु की जमीनी तौर पर सेवा करते हुए लोग बहुत कम ही दिखाई देगें, यह कहना है सूर्या सिंह राणा का हरिद्वार के रहने वाले ऐसे ही नौजवान पत्रकार सूर्या सिह राणा पशु प्रेम के लिए हरिद्वार में ही नहीं बल्कि दूर-दूर तक लोगों के बीच पशु प्रेमी के नाम से जाने जाते हैं उनकी दिनचर्या सुबह जीव जंतुओं की सेवा से आरंभ होकर जीव जंतुओं की सेवा करते हुए शाम हो जाती है सूर्या सिंह राणा का कहना है चिड़िया ..कुत्ते गाय गधे घोड़े बैल आदि सभी जीवो में भगवान का वास है और मुझे उनकी सेवा करने से आत्म संतुष्टि मिलती है.और जिस तरह हमें प्यास भूख लगती है उनको भी बिलकुल उसी तरह लगती है..पशु सेवा में परेशानी बहुत है इसलिए लोग दिखावा तो बहुत करते हैं लेकिन वास्तविक सेवा कोई करना नही चाहता मेरे द्वारा जगह जगह प्यासे जीव जंतु के लिए पानी पीने के लिए बर्तन रखें हुए हैं।

    लेकिन कोई भी व्यक्ति खाली हुए बर्तनों में पानी तक नहीं भर पाते है कहते तो बहुत लोग हैं कि हम भर देंगे लेकिन खाली बर्तनों को भरने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं जबकि कई जगह पर तो जीव जंतुओं के लिए पानी के रखे बर्तनों कोआते जाते वाहनों के द्वारा टक्कर मारकर बर्तन तोड़ देते हैंकोई गाय पानी पीती है तो उसको भगा देते हैं कही गोबर ना कर दे ..ये सब देख दुख होता है. जानवरों को.गंदी नाली का पानी पीते देख भी कोई साफ पानी गाय कुत्ते आदि को पिलाने को तैयार नहीं है।

    उन्होंने बताया पिछले वर्ष आई लंपी बीमारी में बीमारी से ग्रस्त गायों की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग क डाक्टरों की टीमके साथ मिल दूर दराज वाली जगहों पर पहुंचकर उचित समय पर दवाई से कई गोवंश को राहत पहुंचाई गई जिससे मन को संतुष्टि हुई अभी तक उनके द्वारा शहर के विभिन्न स्थानों पर लगभग 600 जीव जंतुओं के पानी पीने चारा खाने के लिए बर्तनों को रखा गया है तथा उनके द्वारा सभी सामाजिक संस्थाओं सामाजिक कार्यकर्ताओं से अनुरोध किया गया है जीव जंतुओं की सेवा के लिए आगे आकर इस परमार्थ के कार्य के लिए अपने अपने क्षेत्र में पशु व जीव जंतुओं केलिए इस चिलचिलाती गर्मी में पानी आदि की व्यवस्था अपने आसपास अवश्य करें।

                  धन सिंह बिष्ट

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

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