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    गर्मी और औद्योगिक गतिविधियों में 6.9% की तेजी से बढ़ी बिजली की मांग

    जैसे-जैसे तापमान बढ़ा और औद्योगिक गतिविधियों में रफ्तार आई, मार्च 2025 में भारत की बिजली की मांग में सालाना आधार पर 6.9% की तेज़ वृद्धि दर्ज की गई। यह पूरे वर्ष की औसत वृद्धि दर 4.3% से काफी अधिक रही। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मांग में वृद्धि का मुख्य कारण शुरुआती हीटवेव के चलते कूलिंग की ज़रूरतों में इजाफा और औद्योगिक व वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की बढ़ती बिजली खपत रही।

    हीटवेव का असर और क्षेत्रीय वृद्धि

    मार्च का औसत तापमान 25.5°C दर्ज किया गया, जो पिछले 30 वर्षों (1991-2020) के औसत 24.71°C से अधिक रहा। अधिकतम औसत तापमान 32.7°C और न्यूनतम 18.3°C रहा, जो दीर्घकालिक औसत से ऊपर था। पश्चिमी और पूर्व-मध्य भारत के कई हिस्सों में 1 से 5 दिन तक हीटवेव की स्थिति देखी गई। गुजरात में छह दिन तक लू चली, जिससे पश्चिमी क्षेत्र में बिजली की मांग में 10% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    इसी दौरान औद्योगिक गतिविधियों में भी तेज़ी देखी गई। फरवरी में इंडिया परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) 56.3 से बढ़कर मार्च में 58.1 पर पहुंच गया, जो आठ महीनों में सबसे ऊंचा स्तर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की कुल बिजली खपत का लगभग आधा हिस्सा औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोग से आता है, इसलिए इन क्षेत्रों में तेजी बिजली की मांग को लगातार बढ़ा रही है।

    बाजार में गतिविधि और बिजली उत्पादन का रुझान

    मार्च में पीक पावर डिमांड 235 गीगावॉट तक पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 14 गीगावॉट अधिक है। ट्रेडिंग के मोर्चे पर रियल टाइम मार्केट (RTM) का वॉल्यूम 34% बढ़कर 3,727 मिलियन यूनिट (MU) हो गया, जबकि डे-अहेड मार्केट (DAM) में 19% की वृद्धि के साथ 5,547 MU की ट्रेडिंग हुई। इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) ने मार्च में अब तक का सबसे अधिक मासिक बिजली ट्रेडिंग वॉल्यूम 11,215 MU दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 29% अधिक है।

    बिजली की बढ़ती मांग के बावजूद, औसत बाजार क्लियरिंग प्राइस मार्च में स्थिर रहा और यह 3.93 रुपये प्रति यूनिट पर बना रहा, जो पिछले वर्ष 3.91 रुपये के आसपास था। इसका कारण बिजली आपूर्ति में भी सुधार रहा। कुल बिजली उत्पादन मार्च में 8% बढ़कर 161 अरब यूनिट (BU) हो गया। कोयले से बिजली उत्पादन 6.7% बढ़कर 120 BU तक पहुंचा, और कुल उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी 75% रही। नवीकरणीय ऊर्जा (RE) उत्पादन में भी 15.4% की सालाना वृद्धि हुई और इसकी हिस्सेदारी 12.7% से बढ़कर 14% हो गई। जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा उत्पादन में क्रमशः 33% और 17% की बढ़ोतरी हुई, जिससे इनकी हिस्सेदारी कुल उत्पादन में 6% और 3% रही।

    कोयला आपूर्ति और भविष्य की मांग का अनुमान

    मार्च में थर्मल पावर प्लांट्स को कोयले की आपूर्ति 6.25% बढ़ी और इस कारण प्लांट्स के पास 58 मिलियन टन कोयले का स्टॉक उपलब्ध था, जो पिछले साल की तुलना में अधिक है। यह स्टॉक 20 दिनों की बिजली आपूर्ति के लिए पर्याप्त है। क्रिसिल इंटेलिजेंस का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (Q1FY26) में बिजली की मांग 6.5% से 7.5% तक बढ़ सकती है, क्योंकि मौसम विभाग ने अप्रैल से जून के दौरान सामान्य से अधिक तापमान की संभावना जताई है।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

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