इस महीने की 26 तारीख़ से रेल किराए को युक्तिसंगत बनाया जा रहा है। सामान्य श्रेणी में 215 किलोमीटर तक की यात्रा के लिए किराए में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इससे अधिक दूरी की यात्रा पर प्रति किलोमीटर एक पैसे की दर से वृद्धि की जाएगी। मेल, एक्सप्रेस और वातानुकूलित गाड़ियों में यह दर 2 पैसे प्रति किलोमीटर होगी।
उप-नगरीय इलाक़ों और मासिक सीजन टिकट के किराए में कोई वृद्धि नहीं की गई है।
रेलवे के अनुसार, किराए में वृद्धि से लगभग 6 सौ करोड़ रूपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। रेलवे ने बताया कि पिछले दशक में रेल ढांचे में काफी वृद्धि हुई है और बेहतर संचालन के लिए जनशक्ति बढ़ाई जा रही है।
बढ़ती लागत, सुरक्षा पर जोर और रेलवे की व्यापक वित्तीय स्थिति
किराये में यह संशोधन ऐसे समय किया गया है जब भारतीय रेलवे लगातार बढ़ती परिचालन लागतों का सामना कर रहा है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा मानव संसाधन से जुड़े खर्चों का है, जो बढ़कर लगभग 1,15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अधिकारियों के अनुसार यह वृद्धि रेलवे नेटवर्क की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और बेहतर कार्यबल प्रबंधन का परिणाम है।
मानव संसाधन खर्च के अलावा रेलवे का पेंशन बिल भी तेजी से बढ़ा है और यह लगभग 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इन दोनों मदों के साथ-साथ रखरखाव, ईंधन, संचालन और अन्य खर्चों को मिलाकर 2024-25 के लिए रेलवे की कुल परिचालन लागत का अनुमान करीब 2,63,000 करोड़ रुपये लगाया गया है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि देश का सबसे बड़ा परिवहन तंत्र अपनी सेवाओं को आधुनिक और सुरक्षित बनाए रखने के लिए कितने बड़े वित्तीय दबावों का सामना कर रहा है।
वहीं आम आदमियों व निम्न आय वर्ग लोगों की जेब पर इसका असर तो दिखेगा ही।

