• Tue. Apr 28th, 2026

    अल्मोड़ा: गो० ब० पन्त राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान में पर्वतीय क्षेत्रों में संरक्षित खेती द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

    गोबिन्द बल्लभ पन्त राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, कोसी कटारमल, अल्मोड़ा द्वारा चलाई जा रही परियोजना ईको-स्मार्ट आदर्श ग्राम विकास परियाजना के अन्तर्गत चयनित ग्राम समूह, ज्योती के 6 ग्रामों ज्योलीशिलिंग, खडकूना, कुज्याडी, दिलकोट, कनेली एवं बिसरा के 60 संरक्षित खेती के लाभाथी किसानी हेतु पर्वतीय क्षेत्रों में संरक्षित खेती द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 10-12 जनवरी, 2023 तक आयोजित किया  गया।
    शिविर की शुरुआतडा0 पारोमिता घोष ने की
    प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सामाजिक एवं आर्थिक विकास केन्द्र की प्रमुख डा0 पारोमिता घोष ने की, उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा देते हुए संस्थान के ईको-स्मार्ट आदर्श ग्राम विकास परियाजना के अन्तर्गत किये जा रहे कार्यों से अवगत कराया। प्रशिक्षण शिविर का संचालन करते हुए संस्थान की वैज्ञानिक डा० शैलजा पुनेठा ने प्रतिभागियों को संरक्षित खेती द्वारा जैविक खेती के विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी देते हुए संरक्षित खेती के अन्दर मल्चिंग तकनीक द्वारा प्याज की खेती का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने मल्चिंग खेती के लाभ बताते हुए किसानों से इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

    प्रशिक्षण के दौरान डा. डी. एस. चौहान ने लाभार्थियों को विभिन्न पर्यावरण मित्र सरल एवं सस्ती तकनीकी की जानकारी दी। इस अवसर पर परियोजना में कार्यरत श्री डी.एस. बिष्ट ने ग्रामीणों को संरक्षित खेती में जैविक खादों के महत्व को समझाते हुए इन्हें तैयार करने की तकनीकी जानकारी दी।

    सभी ग्रामों के जनप्रतिनिधि शामिल
    प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान परियोजना के अन्तर्गत संरक्षित खेती अपनाने वाले किसानों को उन्नत किस्म की प्याज की पाँध सब्सिडी दर पर उपलब्ध करायी गयी साथ ही मल्चिंग तकनीकी को बढ़ावा देने के लिए इच्छुक किसानों को मल्चिंग शीट भी उपलब्ध करायी गयी। प्रशिक्षण शिविर के समापन सत्र में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं ग्रामीण तकनीकी परिसर प्रभारी डा. ऐ. के. साहनी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए पारिस्थिकीय पर्यटन एवं जैविक खेती को जोड़कर आजीविका का साधन बनाने पर विस्तृत जानकारी देते हुए सफल एवं प्रगतिशील कृषकों के भी उदाहरण प्रस्तुत किये प्रशिक्षण शिविर में सभी ग्रामों के जनप्रतिनिधि शामिल थे। जिसमें ग्राम प्रधान कुज्याड़ी  ममता जोशी, ग्राम प्रधान कनैली  दीपा उपाध्याय एवं प्रगतिशील कृषक एवं किसान श्री पुरस्कार विजेता मनोज उपाध्याय ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए इस क्षेत्र में संरक्षित खेती एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए परियोजना के अन्तर्गत संस्थान द्वारा किये जा रहे प्रयासों हेतु धन्यवाद किया।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *