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गौचर में सात दिवसीय राजकीय औद्योगिक बिकास एवं सांस्कृतिक मेले का समापन

उत्तराखंड -चमोली जिले के गौचर में सात दिवसीय राजकीय औद्योगिक बिकास एवं सांस्कृतिक मेले का समापन हुआ। ये सात दिवसीय राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेला हर साल नवंबर के चौदह तारीख को प्रारम्भ होता है बीस नवंबर को समाप्त होता है।इस सात दिवसीय मेले में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के अलग-अलग लोककलाकार व अलग अलग क्षेत्रों के व्यापारियों का प्रतिभाग होता है। इस वर्ष इस मेले का उद्घाटन माननीय मुख्यमंत्री पुस्कर धामी के द्बारा किया गया।हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भी उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के लोकप्रिय लोककलाकारों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बुलाया गया।सोसल मीडिया में सीमा गुसाई के लोकप्रिय लोकगीतों व देवी-देवताओं के जागर के धमाल को देखते हुए।इस मेला कमेटी ने सीमा गुसाई लोकगायिका को देवी-देवताओं के जागर की गाथाओं की प्रस्तुति के लिए बुलाया गया।सीमा गुसाई इस मेले में भगवान श्री कृष्ण के बाल जागर की प्रस्तुति देते हुए मेले में दर्शकों दिल मोह लिया।

आइये आगे बताते चलें चमोली जिले के गौचर मेले की जानकारी के बारे में।यह मेले की शुरुआत सन 1943में गौचर के व्यापार मंडल के द्बारा हुई थी। कई वर्षों से इस मेले को राजकीय औद्योगिक बिकास एवं सांस्कृतिक मेला का नाम दिया गया है।गौचर के सात दिवसीय मेला नवंबर में मनाने की प्रथा इसलिए है। हमारे देश प्रधान मंत्री स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू जी का जन्म 14नवंमर सन 1889में हुआ था आज से 81साल पहले गौचर के व्यापार मंडल ने इस मेले की शुरुआत 14नवंमर को पंडित जवाहरलाल नेहरु जी के जन्म दिवस के तौर मनाने की शुरुआत की इसलिए ये मेला हर साल नवंबर माह के 14तारीख को शुरू होता है।प्रताप सिंह नेगी समाजिक कार्यकर्ता ने बताया उतराखंड के हर मेले व हर देवी देवताओं के सांस्कृतिक अनुष्ठानों के पीछे कोई ना कोई कहावत है इसीलिए हमारे कुमाऊं गढ़वाल में ये देवी देवताओं के नाम सांस्कृतिक कार्यक्रम व अन्य अनुष्ठान व मेले प्राचीन काल से मनाये जातें हैं।

By swati tewari

working in digital media since 5 year

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