कर्णप्रयाग – आल इण्डिया लॉयर्स यूनियन का प्रथम राज्य सम्मेलन दिनांक 8 व 9 अक्टूबर को कर्णप्रयाग में संपन्न हुआ। जिसमें अल्मोड़ा के 4 अधिवक्ताओं सुनीता पांडे, योगेश कुमार, आर पी जोशी तथा दिनेश पांडे ने शिरकत की। सम्मेलन में खराब मौसम के बावजूद अल्मोड़ा, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, गोपेश्ववर, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग समेत अन्य स्थानों से लगभग 75 एडवोकेट्स ने भाग लिया । सम्मेलन को यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पी वी सुरेंद्रनाथन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सोमदत्त शर्मा, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अनिल चौहान, राज्य प्रभारी ब्रजवीर मलिक, बार काउंसिल नैनीताल के रंजन सोलंकी ने संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने न्यायपालिका पर कार्यपालिका के हस्तक्षेप पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि न्यायपालिका का झुकाव सरकारों के पक्ष में होता जा रहा है। मौजूदा समय में हुक्मरानों ने सामाजिक दायित्व खत्म कर दिए हैं। संसद, न्यायपालिका, चुनाव आयोग समेत तमाम सरकारी संस्थान स्वतंत्र नहीं रह गए हैं। जनपक्षीय पत्रकारों, बुद्धिजीवियों को जेलों में डाला जा रहा है। पहले न्यायपालिका का झुकाव समाज की तरफ होता था लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। न्यायपालिका की सोच बदल गई है। सम्मेलन में राज्य संयोजक शंभू मंगाई ने रिपोर्ट प्रस्तुत की । सम्मेलन में ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (ए आई बी इ) परीक्षा खत्म किए जाने, राजस्व न्यायालयों में मैजिस्ट्रेटो की नियुक्ति किए जाने, सेवानिवृत मैजिस्ट्रेटों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को सेवा निवृत्ति के बाद पुनः नियुक्ति न दिए जाने, अवमानना अधिनियम 1971 को समाप्त किए जाने, भूकानून सहित पांच प्रस्ताव पारित किए गए। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता गंगाधर नोटियाल ने की। सम्मेलन में 15 सदस्यीय राज्य कार्यकारणी का गठन किया गया। जिसके अध्यक्ष हाईकोर्ट के अधिवक्ता योगेश पचोलिया, सचिव शंभू ममगाई, उपाध्यक्ष रंजन सोलंकी चुने गए। अल्मोड़ा से राज्य कार्यकारिणी सदस्य योगेश कुमार चुने गए।सम्मेलन को यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पी वी सुरेंद्रनाथन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सोमदत्त शर्मा, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अनिल चौहान, राज्य प्रभारी ब्रजवीर मलिक, बार काउंसिल नैनीताल के रंजन सोलंकी ने संबोधित किया।
अपने संबोधन में उन्होंने न्यायपालिका पर कार्यपालिका के हस्तक्षेप पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि न्यायपालिका का झुकाव सरकारों के पक्ष में होता जा रहा है। मौजूदा समय में हुक्मरानों ने सामाजिक दायित्व खत्म कर दिए हैं। संसद, न्यायपालिका, चुनाव आयोग समेत तमाम सरकारी संस्थान स्वतंत्र नहीं रह गए हैं। जनपक्षीय पत्रकारों, बुद्धिजीवियों को जेलों में डाला जा रहा है। पहले न्यायपालिका का झुकाव समाज की तरफ होता था लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। न्यायपालिका की सोच बदल गई है।
सम्मेलन में राज्य संयोजक शंभू मंगाई ने रिपोर्ट प्रस्तुत की ।
सम्मेलन में ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (ए आई बी इ) परीक्षा खत्म किए जाने, राजस्व न्यायालयों में मैजिस्ट्रेटो की नियुक्ति किए जाने, सेवानिवृत मैजिस्ट्रेटों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को सेवा निवृत्ति के बाद पुनः नियुक्ति न दिए जाने, अवमानना अधिनियम 1971 को समाप्त किए जाने, भूकानून सहित पांच प्रस्ताव पारित किए गए।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता गंगाधर नोटियाल ने की।
सम्मेलन में 15 सदस्यीय राज्य कार्यकारणी का गठन किया गया। जिसके अध्यक्ष हाईकोर्ट के अधिवक्ता योगेश पचोलिया, सचिव शंभू ममगाई, उपाध्यक्ष रंजन सोलंकी चुने गए। अल्मोड़ा से राज्य कार्यकारिणी सदस्य योगेश कुमार चुने गए।
