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भूत-प्रेत, पकड़े जाते हैं इन उपकरणों से, ऐसे होती है उनसे बात, जानें पैरानॉर्मल एक्सपर्ट से पूरी बात

डेस्क – भूत-प्रेत का विषय हमेशा ही लोगों के बीच चर्चाओं का केंद्र रहा है. कोई इसको किसी आत्मा के रूप में लेता है तो कोई सिर्फ एक नकारात्मक ऊर्जा के रूप में.कई बार भूत प्रेत की वास्तविकता पर भी सवाल खड़े किए जाते है. लेकिन पैरानॉर्मल सोसाइटी के मेंबर जिनको पैरानॉर्मल एक्सपर्ट कहते है. वह शोध करके इन मुद्दों पर काम करते हैं.

पैरानॉर्मल एक्सपर्ट के पास कुछ आधुनिक उपकरण होते हैं. जिससे कि वह उस एनर्जी की मौजूदगी का पता लगा पाते हैं. आपने भी कई बार वेब सीरीज या फिर टीवी शो में ऐसा करते हुए उन्हें देखा होगा. लेकिन यह उपकरण क्या होते है? इनकी कितनी कीमत होती है और कैसे भूत प्रेत इन उपकरणों के माध्यम से संपर्क करने में भी सक्षम होते है. पैरानॉर्मल एक्सपर्ट वैभव भारद्वाज ने बताया कि कई तरह के उपकरण होते हैं. जो इन्वेस्टिगेशन के दौरान हमें साथ ले जाने होते हैं. क्योंकि कई बार एनर्जी का प्रभाव इतना ज्यादा होता है कि वह मशीन खराब भी कर देती है. अगर हम बेसिक उपकरण की बात करें तो उसमें टेंपरेचर मीटर, वॉइस रिकॉर्डिंग मशीन, K2 मीटर, नाइट विजन कैमरा मुख्य रूप से काफी अहम भूमिका निभाते हैं.

तीन स्तर  में होती है भूतों से बात
वैभव भारद्वाज ने बताया की भूतों से कम्युनिकेशन के भी ग्रेड होते है जिसमें A लेवल, B लेवल और C लेवल होता है. A लेवल में भूतों से हमें काफी जल्दी संकेत मिलते है और उनकी मौजूदगी दर्ज होती है , वही B लेवल में हमारे सवाल पूछने के बाद जवाब काफी देर बाद मिलता है और C लेवल में कभी जवाब मिलते है तो कभी नहीं. कई बार ऐसा भी होता है की कोई सॉल अगर बात नहीं करना चाहती है तो वो बैटरी ड्रेन करती है या उपकरण से भी छेड़छाड़ करने लगती है.

वइस रिकॉर्डिंग मशीन : टेंपरेचर मीटर के अलावा पैरानॉर्मल एक्सपर्ट अपने साथ एक साउंड रिकॉर्डिंग मशीन भी रखते है. यह आम साउंड रिकॉर्डर से काफी अलग होती है क्योंकि इसमें बारीकी से साउंड फ्रिकवेंसी आदि का आसानी से पता लग पाता है. दरअसल कई बार इन साउंड रिकॉर्डिंग मशीन में उन ऊर्जाओं की ऐसी आहट कैद हो जाती है जो आमतौर पर नहीं सुनी जाती.

टेंपरेचर मीटर : कहा जाता है कि जहां भी कोई एनर्जी होती है उस स्थान पर तापमान का एक विशेष अंतर दर्ज किया जाता है. जहां पर भूत-प्रेत आदि की चीज होती है. उस कमरे का तापमान सामान्य कमरों के मुकाबले अलग होता है. इसलिए टेंपरेचर मीटर से सबसे पहले कमरे का तापमान नापा जाता है और बाहरी तापमान के मुकाबले कितना अंतर है यह भी नोट किया जाता है.

K2 मीटर : K2 मीटर इन्वेस्टिगेशन के दौरान सबसे अहम भूमिका निभाता है. क्योंकि इस मशीन के जरिए ही किसी ऊर्जा का उस स्थान पर होने का पता लगा पता है. कई बार K 2 मीटर में जल रही बत्तियों में बदलाव कर भी यह ऊर्जा अपने बारे में पैरानॉर्मल एक्सपर्ट को बताती है.

क्या होती है चुनौती
इन्वेस्टीगेशन की डिमांड इन और आउट दोनों आती है. अगर घर में investigation करते है तो सबसे पहले ईएमएफ (इलेक्ट्रॉ मैग्नेटिक फील्ड ) को घर में परखा जाता है. इन्वेस्टीगेशन के दौरान ऐसा भी दौर आता है की कुछ नहीं मिलता, कभी कभी ऊर्जा का कहर इतना ज्यादा हो जाता है कि वहां से निकलना पड़ता है क्योंकि वह हमारे लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है.

By D S Sijwali

Work on Mass Media since 2002 ........

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