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    हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ रहे मलेरिया के मामले- रिपोर्ट

    जलवायु परिवर्तन और मौसम में हो रहे बदलावों का असर अब मानव स्वास्थ्य पर साफ दिखने लगा है। हालिया लैंसेट काउंटडाउन की रिपोर्ट बताती है कि हिमालयी क्षेत्रों में मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं, जबकि देश के कई हिस्सों में डेंगू का प्रसार तेजी से हो रहा है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को अपनी स्वास्थ्य और पर्यावरण नीतियों को नए सिरे से व्यवस्थित करने की आवश्यकता है ताकि जलवायु के अनुकूल पूर्वानुमान और सामुदायिक जागरूकता में सुधार हो सके।

    जलवायु परिवर्तन का असर और स्वास्थ्य संबंधी खतरे

    लैंसेट काउंटडाउन की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में, 15 प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में से 10 ने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच कर बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों का संकेत दिया। 2023 में, तापमान के 50 दिन ऐसे थे जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक थे, और इस दौरान उच्च तापमान के चलते गंभीर समस्याएं सामने आईं।

    रिपोर्ट में कहा गया कि जलवायु परिवर्तन के कारण उच्च तापमान और गर्मी के तनाव से होने वाली मौतों में भी वृद्धि हुई है। विशेष रूप से, 65 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों में, 1990 की तुलना में तापमान जनित मौतों में 167 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। साथ ही, 1990 की तुलना में 27.7 प्रतिशत अधिक लोगों को अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक आय में लगभग $835 बिलियन का अनुमानित नुकसान हुआ। यह समस्या खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में गंभीर रूप से महसूस की गई।

    संक्रामक रोगों में वृद्धि

    बढ़ते तापमान ने डेंगू, मलेरिया, वेस्ट नाइल वायरस और विब्रियोसिस जैसे रोगों के प्रसार के लिए अनुकूल परिस्थितियां उत्पन्न की हैं। हिमालयी क्षेत्र जैसे नए इलाकों में मलेरिया के मामले देखे जा रहे हैं, जहां पहले इसका प्रभाव नहीं था। डेंगू के बढ़ते मामलों के साथ, देश को संक्रामक रोगों के खिलाफ अधिक सतर्कता की आवश्यकता है।

    सूखा और खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव

    रिपोर्ट में बताया गया कि 2023 में वैश्विक भूमि का 48 प्रतिशत हिस्सा कम से कम एक महीने के लिए गंभीर सूखे से प्रभावित रहा, जो 1951 के बाद दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे न केवल फसल उत्पादन पर असर पड़ा, बल्कि खाद्य और पानी की सुरक्षा भी प्रभावित हुई। सूखे और लू की घटनाओं में वृद्धि से खाद्य असुरक्षा का खतरा भी बढ़ा है, जिससे 124 देशों के 151 मिलियन लोग प्रभावित हुए हैं।

    सकारात्मक कदम

    रिपोर्ट ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कुछ सकारात्मक घटनाओं पर भी प्रकाश डाला है। कोयले के इस्तेमाल में कमी से वायु प्रदूषण जनित मौतों में गिरावट देखी गई और 2023 में स्वच्छ ऊर्जा में वैश्विक निवेश $1.9 ट्रिलियन तक पहुंच गया। साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है, जो कि एक मजबूत और सतत भविष्य के लिए उत्साहवर्धक संकेत है।

    आगे की दिशा

    लैंसेट रिपोर्ट के अनुसार, भारत को स्वास्थ्य और पर्यावरणीय नीतियों को पुनर्जीवित करते हुए वित्तीय निवेश को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। बदलते जलवायु परिवेश के खतरों से निपटने के लिए एक मजबूत स्वास्थ्य ढांचे और सामुदायिक जागरूकता को बढ़ावा देना आवश्यक है।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

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