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प्रो. दाता राम पुरोहित उत्तराखंड की लोक कलाओं के संवर्धन में अमूल्य योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार 23 फरवरी को नई दिल्ली में श्रीनगर गढ़वाल निवासी प्रख्यात संस्कृतिकर्मी और शिक्षाविद प्रो. दाता राम पुरोहित को उत्तराखंड की लोक कलाओं के संवर्धन में अमूल्य योगदान के लिए साल 2021 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया।
कोरोना संक्रमण के कारण पिछले तीन सालों से पुरस्कार वितरण कार्यक्रम नहीं हुआ था। उल्लेखनीय है कि संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भारत में प्रदर्शन कला वर्ग में दिए जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार है। देश के इस प्रतिष्ठित पुरस्कार वितरण की परंपरा 1952 से चली आ रही है, जिसके तहत हर साल संगीत, नृत्य, रंगमंच, पारंपरिक कलाओं, कठपुतली कला और अन्य विविध प्रदर्शन कला के क्षेत्र में कलाकारों द्वारा दिए गए विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें रत्न सदस्यता और अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।

मूल रूप से उत्तराखंड के जनपद रुद्रप्रयाग के क्वीली गांव निवासी प्रो. डीआर पुरोहित वर्तमान में गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में एडर्जेंट प्रोफेसर के रूप में कार्य कर रहे हैं। 2006 में उन्होंने इस विभाग की स्थापना की थी और वर्ष 2007 से लेकर 2010 तक इसी विभाग में निदेशक भी रहे। उत्तराखंड की लोक कलाओं को अपने शोध कार्यों के माध्यम से पूरी दुनिया में एक अलग पहचान दिलाने के लिए उन्होंने जर्मनी की प्रतिष्ठित हाइडिलबर्ग युनिवर्सिटी से लेकर अमेरिका की प्रिंस्टन युनिवर्सिटी तक दुनियाभर की दर्जनभर विश्वविद्यालयों और संस्थानों में व्याख्यान दिए। प्रो. पुरोहित ने उत्तराखंड की ढोल वाद्य शैली, पंडवाणी, भड़वार्ता, जागर, रम्माण, नंदा के गीत और बादी बदीणों के गीतों पर शोध कर उनके अकादमिक प्रचार प्रसार में अहम भूमिका निभाई है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस दौरान प्रो. डीआर पुरोहित के अलावा शास्त्रीय गायक छन्नू लाल मिश्र, लोक गायिका तीजन बाई, भजन गायक अनूप जलोटा समेत देश के कई प्रतिष्ठित कलाकारों को भी सम्मानित किया। अकादमी फेलो के सम्मान में तीन लाख की पुरस्कार राशि दी जाती है, जबकि अकादमी पुरस्कार में एक ताम्रपत्र के अलावा एक लाख रुपये की नकद राशि दी जाती है।

By swati tewari

working in digital media since 5 year

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