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    Scholarship scam: 6.7 लाख से अधिक धोखाधड़ी मामले, भारत में लाखों नकली छात्रवृत्ति आवेदकों का खुलासा

    भारत भर में छात्र कॉलेज प्रवेश और छात्रवृत्ति परिणामों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है—छात्रों और उनके परिवारों को लक्षित करने वाले बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी Scholarship scam के मामले। शिक्षा में वित्तीय सहायता प्राप्त करने के सपने देख रहे कई छात्र धोखाधड़ी योजनाओं का शिकार हो रहे हैं। हालिया सरकारी जांचों ने चौंकाने वाला डेटा सामने लाया है, जो इस धोखाधड़ी के पैमाने को उजागर करता है।

    2022-2023 के छात्रवृत्ति आवेदन की जांच में यह पाया गया कि 25.5 लाख आवेदकों में से 6.7 लाख से अधिक आवेदक नकली थे। बायोमेट्रिक सत्यापन से यह पुष्टि हुई कि छात्रवृत्ति नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाले केवल 30% छात्र ही असली थे। ये निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि कैसे धोखेबाज उन छात्रवृत्ति योजनाओं का फायदा उठा रहे हैं जो विशेष रूप से निर्धन छात्रों के लिए बनाई गई थीं।

    नकली संस्थान और झूठे लाभार्थी
    माइनॉरिटी अफेयर्स मंत्रालय की एक रिपोर्ट में यह सामने आया कि 1,572 अल्पसंख्यक संस्थानों की जांच में से करीब 830 संस्थान या तो नकली थे या निष्क्रिय थे। इन संस्थानों ने पांच वर्षों में ₹144.83 करोड़ की राशि हड़प ली—यह पैसा अल्पसंख्यक छात्रों की शिक्षा के लिए था। इस धोखाधड़ी के पैमाने को देखते हुए मंत्रालय ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है।

    एक अन्य मामले में, हिमाचल प्रदेश में छात्रवृत्ति धोखाधड़ी की जांच की गई, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई के अधिकारियों पर एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के लिए ₹250 करोड़ की राशि गबन करने का आरोप है। इस मामले में ₹18.27 करोड़ की संपत्तियां जब्त की गई हैं।

    त्रिपुरा में छात्रों पर गहरा ध्यान और विशेषज्ञों की चेतावनी
    त्रिपुरा में राज्य सरकार उन 34 छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की योजना बना रही है, जिन्होंने पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्तियों का लाभ उठाने के लिए नकली आय प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे। यह घटना यह दर्शाती है कि सिर्फ संस्थान ही नहीं, बल्कि व्यक्ति भी इन योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती शिक्षा लागत छात्रों को नकली छात्रवृत्ति योजनाओं के जाल में फंसा रही है। जयपुरिया इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के डॉ. दीपंकर चक्रवर्ती ने कहा कि पेशेवर शिक्षा इतनी महंगी हो गई है कि छात्र, हताश होकर, छात्रवृत्ति के नाम पर धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। धोखेबाज अक्सर बैंक विवरण, अग्रिम भुगतान या व्यक्तिगत डेटा मांगते हैं और खुद को वैध संस्थाएं बताते हैं।

    सरकार की कार्रवाई और जागरूकता अभियान
    इन बढ़ती धोखाधड़ी के मामलों का मुकाबला करने के लिए सरकार ने संस्थानों के लिए कड़ी सत्यापन प्रक्रियाएं लागू की हैं, जिनमें ग्राउंड चेक भी शामिल हैं। साथ ही, छात्रों और उनके माता-पिता को धोखाधड़ी की पहचान करने के लिए सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं—जैसे कि अनचाहे प्रस्ताव, अग्रिम शुल्क और अस्पष्ट पात्रता मानदंड। इन कदमों का उद्देश्य असली लाभार्थियों की सुरक्षा करना और सुनिश्चित करना है कि छात्रवृत्तियां योग्य छात्रों तक पहुंचें।

    By D S Sijwali

    Work on Mass Media since 2002 ........

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