कविता बहुगुणा की लिखी कविता सावन का आगमन
सावन का आगमन जमीन गीली है आसमां है बादलों से भरा ना ही धूप है ना ही अंधेरा कोहरे से…
सावन का आगमन जमीन गीली है आसमां है बादलों से भरा ना ही धूप है ना ही अंधेरा कोहरे से…
मुझे दिव्यांग कहने वालेमुझे दिव्यांग कहने वालेतू भी दिव्यता का अनुभव कर,सिर्फ एक साल के लिए अपनीबांध ले पट्टी आखों…
मेरा एक सपना है, अपने सपनो को पूरा करूँगा, मेरा एक सपना है, अपने सपनो को पूरा करूंगा, काम मांगने…
दिव्यांग हुए तो क्या हुआ! अरमान किसी से कम तो नहीं।। माना हम तुमसे धीमे हैं पर फिर भी तुम…