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    रिमझिम बारिश के बीच मां नंदा व मां राजेश्वरी को मायके से किया गया विदा

    श्री सिद्ध पीठ के प्रांगण में तीन दिवसीय राजजात यात्रा संपन्न

    चमोली -नंदा नगर कुरुण सिद्ध पीठ मां नंदा देवी के प्रांगण में मां नंदा व मां राजेश्वरी को मायके विदा करने लिए रिमझिम वर्षा के बाबजूद भी आस्था व उत्साह पूर्वक तीन दिवसीय नंदा देवी राजजात यात्रा के साथ चमोली के कुरुण श्री सिद्ध पीठ के प्रांगण में आयोजित किया गया।

    चमोली के नंदा नगर कुरुण क्षेत्र मां नंदा देवी, छोटी बहन राजेश्वरी का मायका माना जाता है। चमोली के दूरदराज के गांवों के महिला मंगलदल, महिला समूह व क्षेत्रीय जनता के द्बारा प्राचीन काल से ही मां नंदा (पार्वती)जो अनेकों नाम पूजी जाती है।

    मां नंदा व छोटी बहन राजेश्वरी देवी को कुरुण श्री सिद्ध पीठ नंदा नगर अपने मायके से ससुराल कैलाश भेजने के लिए तीन दिवसीय महोत्सव का आयोजन किया जाता है।

    नम आँखों से देवी मां को करते विदा

    मां नंदा,व राजेश्वरी देवी की दो डोलियां बनाई जाती है।जब उन डोलियो को कैलाश ससुराल को विदा करने के लिए प्रस्थान किया जाता है तब चमोली की महिलाओं व बहन बेटियों को डोली में लिपट कर रोते हुए बोला जाता है मां नंदा व राजेश्वरी देवी आप अपने ससुराल कैलाश जाकर अपने मायके की राजि खुशी हालचाल पूछते रहना अपने मायके को राजि खूशी खुश रखना जब मां नंदा व छोटी बहन राजेश्वरी की डोलियां चमोली जिले के कुरुण श्री सिद्ध पीठ नंदा नगर से कैलाश व बद्रीनाथ को प्रस्थान होती है।तब सभी महिलाओं व बहन बेटियों की आंखें नम हो जाती है यह बड़ा मार्मिक दृश्य होता है।

    हर साल तीन दिन का ये महोत्सव होता है इस बार सात सितंबर से नौ सितंबर तक मनाया गया। अपनी आराध्य देवी की डोली को नागपुर पट्टी के कुमेडा गांव जोशी मठ इंद्रमति मंदिर होते हुए बद्रीनाथ पहुंचाई पाण्डेकेश्वर पहुंचने के बाद माता की डोलियां जोशी मठ नरसिंह देवता के मंदिर होते हुए कैलाश तक बिदा किया मां नंदा की डोली ससुराल तक पहुंचाने के लिए कहावत है।एक डोली मां देवी के मायके कुरुण क्षेत्र मे वापस आती है। लेकिन एक डोली छै महीने तक वहीं रहती है।छै महीने बाद मकरसंक्रांति को उस डोली को वापस लाया जाता है।ये तीन दिवसीय मां नंदा व जागेश्वरी देवी का महोत्सव चमोली जिले में धूमधाम से मनाया जाता है।

    चमोली जिले के महिला मंगलदल व महिला समूह के द्बारा ये तीन दिवसीय महोत्सव में अपने अपने स्तर से अपने उतराखड की पोषाक व उतराखड के पहनावे के साथ-साथ बढ़कर प्रतिभाग किया। इनके द्बारा लोकनृत्य व लोकगीत व जागार गाया गया इन महिला समूह व मंगल दल की को प्रथम स्थान व, द्वितीय स्थान तत्तीय स्थान मिला हर साल ऐसे ही मानते हैं।

    जब मां नंदा देवी महोत्सव होता है तब मां नंदा देवी की प्रतिमा नौटी गांव श्री सिद्ध पीठ नंदा देवी नंदा देवी धाम लाई जाती है। लेकिन राजेश्वरी देवी की प्रतिमा छह महीने के बाद ससुराल से मकरसंक्रांति को ही वापस लाई जाती है।

    चमोली जिले की बाजबगड नंदा नगर घाट की रहने वाली दिपेस्वरी बिष्ट ने बताया हम हर साल सदियों से मां नंदा व राजेश्वरी देवी का तीन दिवसीय महोत्सव मानते आ रहे हैं।नौटी गांव में अष्टमी को इस नंदा प्रतिमा को प्रतिष्ठित किया जायेगा। लेकिन एक प्रतिमा छै महीने के बाद मकरसंक्रांति को कुरुण क्षेत्र में आयेगी। नंदा मां सुनंदा व जागेश्वरी व गौरा देवी किसी रुप से भी आये मानो सब पार्वती मां के अवतार है।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

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