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    जनकवि गिर्दा की 14 पुण्यतिथि आज, सांस्कृतिक नगरी में उनका भावपूर्ण स्मरण

    अल्मोड़ा। जनकवि गिरीश तिवारी गिर्दा की 14 पुण्य तिथि पर सांस्कृतिक नगरी में उनका भावपूर्ण स्मरण किया गया। उनके रचित तथा गाए गीतों के साथ ही पसंदीदा गीतों का भी सामूहिक तौर पर गायन किया गया। वरिष्ठ रंगकर्मी पत्रकार नवीन बिष्ट के संयोजन में स्वागत की छत पर हुए कार्यक्रम में लोक गायकों के साथ ही समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हुए।

    गिरीश तिवारी “गिर्दा” (10 सितंबर 1945 – 22 अगस्त 2010) उत्तराखंड , भारत में एक पटकथा लेखक, निर्देशक, गीतकार, गायक, कवि, जैविक संस्कृतिविद्, साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता थे।


    गिर्दा के चित्र पर मौजूद लोगों ने पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धाजलि दी। उत्तराखंडा मेरी मातृ भूमि गीत के साथ सामूहिक गायन की शुरूआत हुई। इसके बाद लोगों ने हुड़के की थाप पर उनके गाए कई गीत गाए। इनमें ततू नि लगा उदेश घुनन मुनई न टैक, सौ सत्तर आदमी फिलहाल जब नासाद हैं दिल पर रख कर हाथ कहिये देश क्या आजाद है। कस हलो उत्तराखंड कस होली व्यवस्था समेत कई गीत गाए गए हैं।

    वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के गठन के 24 साल बाद भी गिर्दा जैसी जन कवि के सोच के अनुसार व्यवस्था नहीं बन सकी है। समाज में संघर्षरत ताकतों को एकजुट होकर जनभावना के अनुसार उत्तराखंड की व्यवस्था बनाने के लिए आगे आना होगा। यही स्व गिर्दा को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अध्यक्षता रेवती बिष्ट संचालन नवीन बिष्ट व अखिलेश टम्टा ने संयुक्त तौर पर किया। इस मौके पर निर्वतमान पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी गिर्दा के निकट रहे उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी लोक गायिका राधा तिवारी चंदन बोरा भाष्कर भौंर्याल दयानंद कठैत कृष्ण कुमार सिंह नंदा डा निर्मल जोशी मोहन कांडपाल पूरन चंद्र तिवारी हेम रौतेला सुरेंद्र बिष्ट अशोक पांडे हीरा देवी नीरज पंत कल्याण मनकोटी जंगबहादुर थापा एड जगत रौतेला राजेंद्र तिवारी अजय मित्र बिष्ट नारायण राम जीवन चंद्र उदय किरौला शिवदत्त पांडे, कुंदन लाल शंभू राणा आशीष जोशी उमेश सिंह हरीश भंडारी जगदीश जोशी भावना पांडे राकेश पांडे समेत बड़ी तादात में लोग शामिल हुए।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

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