देश ने आज महात्मा गांधी की 75वीं पुण्यतिथि पर राष्ट्रपिता को याद किया। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राजघाट पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने बापु की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस संबंध में राष्ट्रपति के ट्विटर हैंडल से एक वीडियो ट्वीट भी किया गया है।
1948 में आज ही के दिन महात्मा गांधी की हुई थी हत्या
ज्ञात हो, प्रतिवर्ष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि 30 जनवरी को कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें याद कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। इस दिन को शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। 1948 में आज ही के दिन महात्मा गांधी की हत्या हुई थी। भारत में आजादी के ठीक एक साल बाद इसी तारीख को महात्मा गांधी की हत्या की खबर से समूची दुनिया स्तब्ध रह गई थी और समूचा राष्ट्र रो पड़ा था।
गांधी जी की प्रेरणा से देश आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की ओर अग्रसर
उनकी प्रेरणा से ही देश आज एक नए, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की ओर अग्रसर है। देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले शहीदों की प्रेरणा हमारे इस संकल्प को सदा मजबूत करते रहेंगे। इसी उपलक्ष में आज गांधी जी की पुण्यतिथि पर नई दिल्ली में राजघाट स्थित गांधी समाधि पर अंतरधार्मिक प्रार्थना सभा का भी आयोजन किया गया। इस दौरान पीएम मोदी राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी की समाधि पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
अहिंसा की शक्ति से पूरी दुनिया को कराया परिचित
साल 1949 से इस परंपरा का निर्वहन हम करते आ रहे हैं। अहिंसा की राह पर चलते हुए गांधी जी ने देश को अंग्रेजों की दासता से मुक्ति दिलाने में अहम भूमिका अदा की। इस प्रकार महात्मा गांधी ने अहिंसा की शक्ति से पूरी दुनिया को अपने विचारों से प्रभावित किया है। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर कई किताबें भी लिखीं, जो हमें आज भी जीवन की नई राह दिखाती हैं क्योंकि उनके ये अनुभव, उनका अहिंसा का सिद्धांत, उनके विचार आज भी उतने ही सार्थक हैं, जितने उस दौर में थे।
गांधी के विचारों में थी ऐसी ताकत, विरोधी भी करते थे तारीफ
गांधी के विचारों में ऐसी ताकत थी कि विरोधी भी,म9 उन2ओसकी तारीफ किए बगैर नहीं रह सकते थे। 30 जनवरी, 1948 को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी। 02 अक्टूबर, 1869 को पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी ने राजनीति में कभी कोई बड़ा पद भले ही हासिल नहीं किया हो लेकिन अपने कार्यों की बदौलत वे साधारण से नागरिक होते हुए भी महात्मा गांधी बन गए और आज राष्ट्रपिता के रूप में जाने ।
