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सनातन धर्म में गंगा दशहरा का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पवित्र दिन मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। राजा भगीरथ के कठिन तप से प्रसन्न होकर मां गंगा उनके पूर्वजों की आत्माओं की शांति और पूरी पृथ्वी के कल्याण के लिए धरती पर आईं।
कहा जाता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान करने से मनुष्य के दस प्रकार के पाप (3 कायिक, 4 वाचिक और 3 मानसिक) नष्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि इसे ‘दशहरा’ (दस पापों को हरने वाला) कहा जाता है।
उत्सव और पूजा विधि
गंगा दशहरा के दिन श्रद्धालु दूर-दूर से आकर पवित्र तीर्थों (विशेषकर ऋषिकेश, हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज) में गंगा स्नान करते हैं।
मुख्य परंपराएं:
पवित्र स्नान: सूर्योदय के समय गंगा जी में डुबकी लगाना सबसे उत्तम माना जाता है।
दान-पुण्य: इस दिन सत्तू, मटका, पंखा, खरबूजा, और वस्त्र जैसी शीतल वस्तुओं का दान करने का विशेष महत्व है।
दीपदान: शाम के समय गंगा घाटों पर हजारों दीये जलाए जाते हैं, जिससे घाटों की छटा अलौकिक हो जाती है।
पर्यावरण और हमारी जिम्मेदारी
मां गंगा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की जीवनधारा हैं। आज के समय में गंगा दशहरा मनाने की सार्थकता तभी पूरी होगी जब हम गंगा को स्वच्छ रखने का संकल्प लेंगे। इस पावन पर्व पर आइए हम सब मिलकर यह प्रण लें कि हम नदियों में प्लास्टिक या कचरा नहीं फेंकेंगे और अपनी इस अनमोल धरोहर को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखेंगे।
“नमामि गंगे तव पाद पंकजम”
आप सभी को गंगा दशहरा के महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!
This post was published on 25/05/2026 4:10 AM