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भाकृअनुप-विवेकानन्द संस्थान के हवालबाग प्रक्षेत्र में कार्मिकों को मिला संतुलित खाद एवं उर्वरक और खरपतवार नियंत्रण का प्रशिक्षण

ByD S Sijwali

May 28, 2026

भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के प्रगामी और निरंतर प्रयासों के
तहत, संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्‍त के कुशल मार्गदर्शन एवं निर्देशन में, संस्थान के प्रयोगात्‍मक
प्रक्षेत्र, हवालबाग में वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्मिकों हेतु “खरपतवार प्रबंधन एवं संतुलित खाद-उर्वरक
प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन 26 मई 2026 को किया गया। इस
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रक्षेत्र में संचालित विभिन्न परीक्षणों एवं अन्य इकाइयों में प्रभावी खरपतवार
नियंत्रण, कृषि रसायनों के वैज्ञानिक उपयोग तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना था। यह
कार्यक्रम राष्‍ट्रीय अभियान ‘संतुलित खाद-उवर्रक प्रबन्‍धन’ के अन्‍तर्गत संस्‍थान के प्रक्षेत्र पर भी उर्वरकों
के प्रयोग का संतुलित प्रयोग तथा उर्वरकों की मात्रा को घटाकर राष्‍ट्रव्‍यापी अभियान में सहयोग देना था।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, फसल उत्पादन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. आर. पी. मीणा ने खरीफ
फसलों—विशेषकर धान, सोयाबीन, मक्का एवं मंडुवा में खरपतवारों की सटीक पहचान, उनके वर्गीकरण,
समेकित खरपतवार प्रबंधन तथा रासायनिक खरपतवार नियंत्रण के वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तृत
जानकारी दी। उन्होंने घास कुल, चौड़ी पत्ती एवं मोथा वर्ग के खरपतवारों के प्रभावी नियंत्रण हेतु विभिन्न
खरपतवारनाशी के चयन, उनके उपयोग के सही समय, खरपतवारनाशी की मात्रा निर्धारण, जल मात्रा की
गणना, स्प्रेयर अंशांकन तथा लघु परीक्षण क्षेत्रों में रसायनों के सटीक प्रयोग की उन्नत तकनीकों पर प्रकाश
डाला। प्रशिक्षण के दौरान प्रक्षेत्र की विभिन्न फसल प्रणालियों, परियोजनाओं एवं अनुसंधान योजनाओं से
एकत्रित मृदा नमूनों के विश्लेषण के आधार पर मृदा उर्वरता की वर्तमान स्थिति भी दर्शायी गई। इस मृदा
परीक्षण के अंतर्गत पी एच मान, विद्युत चालकता, जैविक कार्बन, उपलब्ध नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं
पोटाश का विस्तृत आंकलन किया गया तथा मृदा परीक्षण के परिणामों पर आधारित संतुलित उर्वरक
उपयोग पर विशेष बल दिया गया।
इस अवसर पर फसल सुधार के विभागाध्‍यक्ष डॉ. निर्मल कुमार हेडाउ तथा फसल उत्पादन के
विभागाध्यक्ष डॉ. बृजमोहन पाण्डेय भी उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि रसायनों एवं उर्वरकों के वैज्ञानिक एवं
संतुलित प्रबंधन की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि इनपुट रसायनों के विवेकपूर्ण उपयोग से खेती की
लागत में कमी, संसाधन उपयोग दक्षता में वृद्धि तथा कृषि प्रक्षेत्र की लाभप्रदता को उल्लेखनीय रूप से
बढ़ाया जा सकता है। डॉ. मीणा ने कहा कि “सही खरपतवारनाशी, सही मात्रा, सही समय एवं सही विधि”
का सिद्धांत अपनाकर ही प्रभावी खरपतवार नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सकता है, जबकि मृदा परीक्षण
आधारित पोषक तत्व प्रबंधन से उर्वरक उपयोग दक्षता एवं फसल उत्पादकता में व्यापक सुधार संभव है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्मिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया
तथा सक्रिय सहभागिता करते हुए विभिन्न तकनीकी विषयों एवं व्यावहारिक समस्याओं पर गहन विचार-
विमर्श किया। इस प्रशिक्षण के पश्‍चात सभी कार्मिक, जो कि संतुलित खाद – उर्वरक प्रयोग से जुड़े है,
विभिन्‍न गांवों में जाकर कृषकों को संतुलित खाद-उर्वरक के प्रयोग तथा खरपतवार नियंत्रण के बारे में
कृषकों को पहले से अधिक दक्ष तरीके से जागरूक करेंगे।

By D S Sijwali

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