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    ट्रंप का दावा: भारत-पाकिस्तान संघर्ष को परमाणु युद्ध से बचाया

    Byswati tewari

    May 17, 2025 #FIH

    ट्रंप का दावा: भारत-पाकिस्तान संघर्ष को परमाणु युद्ध से बचाया परमाणु युद्ध की कगार पर भारत-पाकिस्तान: ट्रंप का दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक साक्षात्कार में दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे दोनों देशों को संभावित परमाणु संघर्ष से बचाया गया। ट्रंप ने इस स्थिति को “एन शब्द” के रूप में संदर्भित किया, जिसका अर्थ उन्होंने “न्यूक्लियर” (परमाणु) बताया। उन्होंने कहा कि यह उनकी सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलताओं में से एक है, जिसे शायद ही कभी उचित श्रेय मिलेगा। भारत की प्रतिक्रिया और द्विपक्षीय वार्ता का जोर भारत सरकार ने ट्रंप के इस दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम की समझौता दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMOs) के बीच द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से हुआ था। भारत ने हमेशा से यह रुख अपनाया है कि सभी मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय बातचीत से होना चाहिए, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से। ऑपरेशन सिंदूर और संघर्ष विराम की पृष्ठभूमि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। इन हमलों में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के 100 से अधिक आतंकवादियों को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में पाकिस्तान ने सीमा पार से गोलाबारी और ड्रोन हमले किए, जिससे भारत ने भी पाकिस्तान के रडार स्टेशनों, हवाई अड्डों और संचार केंद्रों पर जवाबी कार्रवाई की। संघर्ष विराम और जारी तनाव 10 मई को दोनों देशों ने सभी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने की घोषणा की। हालांकि, संघर्ष विराम के कुछ ही घंटों बाद जम्मू-कश्मीर में ड्रोन गतिविधियों और विस्फोटों की घटनाएं सामने आईं, जिससे भारतीय सुरक्षा बलों को हवाई रक्षा प्रणाली सक्रिय करनी पड़ी। इन घटनाओं ने संघर्ष विराम की नाजुकता और क्षेत्र में जारी तनाव को उजागर किया। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पर भारत की स्थिति ट्रंप के दावों के बावजूद, भारत ने स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित सभी मुद्दे भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रूप से सुलझाए जाएंगे। भारत की विदेश नीति में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के लिए कोई स्थान नहीं है, और यह रुख लंबे समय से कायम है।

    By swati tewari

    working in digital media since 5 year

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